राजनीती की जंजीरों पर जकड़े हुए बडबोले नेता उत्तराखंड जितना छोटा राज्य है उतना अधिक यहाँ नेताओ की भर मार है चाय की दुकान से लेकर प्रदेश के सत्ता के गलियारों तक बस नेताजी ही नेताजी है
राजकाज में मुख्य भूमिका निभाने वाले सचिवालय में तो राजनीती का सबसे बड़ा अखाडा है अधिकारी तो सरकार को अपनी जागीर मानते है प्रदेश की वित्तीय स्थिति किसी से छुपी नहीं हुई है
राज्य में बेरोजगारों की फ़ौज बढती ही जा रही है राज्य सरकार के कई विभागों में कई पद रिक्त है सचिवालय में बैठे अधिकारी मुख्यमंत्री व मंत्रियो को कमजोर वितीय स्थिति का हवाला देकर रिक्त पदों पर भर्ती के मामलो को लटकाया जा रहा है (बेक डोर-आउट सोर्स को ठेके देकर अपने लोगो को नौकरियों में घुसाया जा रहा है) नौकरशाही का सरकार पर हावी होने का मुख्य कारण सरकार का कमजोर होना आश्चर्य तो यह है कि सरकार एक और तो वार्षिक बजट कार्य रोजना तैयार करती है और दूसरी और योजना को संचालित करने हेतु आवश्यक सृजित पदों पर भर्ती नहीं करती है जिसके कारण योजना के कार्य समय से पुरे नहीं होते कार्य में गुणवता नहीं रहती और बजट भी लैप्स हो जाता है
केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में कही परियोजना संचालित की जा रही है जिसमे 65 फीसदी बजट केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है नौकरशाही कि निष्क्रियता के कारण केंद्र सरकार की परियोजनाओ में कई पद रिक्त चल रहे है और बजट प्रतिवर्ष लैप्स हो रहा है
Monday, 25 February 2013
नेताबाजी:रविश पोखरियाल
11:48
No comments
Subscribe to:
Post Comments (Atom)






0 comments:
Post a Comment