नंदा देवी राजजात, उत्तराखंड

नन्दा देवी (Nanda Devi)राजजात भारत के उत्तरांचल राज्य में होने वाली एक नन्दा देवी की एक धार्मिक यात्रा है। यह उत्तरांचल के कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। यह लगभग १२ वर्षों के बाद आयोजित होती है

पौड़ी नगर, गढ़वाल, उत्तराखंड

Pauri Garhwal-पौड़ी गढ़वाल (गढ़वाल जिला) भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक जिला है ।जिले का मुख्यालय पौड़ी है|

एक दृश्य(बैजरो के नजदीक), गढ़वाल, उत्तराखंड

बैजरो (Baijro) राष्ट्रिय राजमार्ग १२१ पर बसा एक क़स्बा है, यह उसी के आप पास का दृश्य है

ढोल-दमाऊं (उत्तराखंडी वाद्य यंत्र)

ढोल और दमाऊं उत्तराखंड के लोक वाद्ययंत्र हैं। इसकी ताल लोगों को झूमने की लिए मजबूर कर देती है।

एक दृश्य, टेहरी बाँध के नजदीक

यह बाँध गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई २६१ मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध बनाती है।

Wednesday, 27 February 2013

ट्रेनों की सूची : रेल बजट 2013-14

नई एक्सप्रेस ट्रेन--
1. अहमदाबाद-जोधपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया समदड़ी, भिलड़ी
2. अजनी (नागपुर) -लोकमान्य तिलक (टी) एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया हिंगोली
3. अमृतसर-लालकुआं एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया चंडीगढ़
4. बांद्रा टर्मिनल-रामनगर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया नागदा, मथुरा, कानपुर, लखनऊ, रामपुर
5. बांद्रा टर्मिनल-जैसलमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया मारवाड़, जोधपुर
6. बांद्रा टर्मिनल-हिसार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया अहमदाबाद, पालनपुर, मारवाड़, जोधपुर, डेगाना
7. बांद्रा टर्मिनल-हरिद्वार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया वलसाड
8. बेंगलूरू-मंगलोर एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
9. बठिंडा-जम्मूतवी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया पिटयाला, राजपुरा
10. भुवनेश्वर-हज़रत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया संबलपुर
11. बीकानेर-चेन्नई एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया जयपुर, सवाईमाधोपुर, नागदा, भोपाल, नागपुर
12. चंडीगढ़-अमृतसर इंटरिसटी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली), लुधियाना
13. चेन्नई-करईकुडी एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
14. चेन्नई-पलनी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया जोलारपेट्टै, सेलम, करूर, नामक्कल
15. चेन्नई एग्मोर-तंजावूर एक्सप्रेस (दैनिक) वाया विलुपुरम, मइलादुतुरै
16. चेन्नई-नागरसोल (साई नगर शिरडी के लिए) एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया रेणिगुंटा, धोने, काचेगुडा
17. चेन्नई-वेलनकन्नी लिंक एक्सप्रेस (दैनिक) वाया विलुपुरम, मइलादुतुरै, तिरूवरूर
18. कोयंबतूर-मन्नारगुडी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया तिरूचिरापल्ली, तंजावूर, निदामंगलम
19. कोयंबतूर-रामेश्वरम एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
20. दिल्ली -फिरोज़पुर इंटरिसटी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया बठिंडा
21. दिल्ली सराय रोहिल्ला-सीकर एक्सप्रेस (साप्ताह में दो दिन) आमान परिवर्तन के बाद
22. दिल्ली-होशियारपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
23. दुर्ग-जयपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
24. गांधीधाम-विशाखापट्नम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया अहमदाबाद, वर्धा, बल्लारशाह, विजयवाड़ा
25. हजरत निजामुद्दीन-मुंबई एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया भोपाल, खंडवा, भुसावल
26. हावड़ा-चेन्नई एसी एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) वाया भिक, दुव्वादा, गुडूर
27. हावड़ा-न्यू जलपाईगुडी एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया मालदा टाऊन
28. हुबली-मुंबई एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया मिरज, पुणे
29. इंदौर-चंडीगढ़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया देवास, उज्जैन, गुना, ग्वालियर, हज़रत निजामुद्दीन
30. जबलपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया नागपुर, धमार्वरम
31. जयपुर-लखनऊ एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) वाया बांदीकुई, मथुरा, कानपुर
32. जयपुर-अलवर एक्सप्रेस (दैनिक)
33. जोधपुर-जयपुर एक्सप्रेस (दैनिक) वाया फुलेरा
34. जोधपुर-कामाख्या (गुवाहाटी) एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया डेगाना, रतनगढ़
35. काकीनाडा-मुंबई एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन)
36. कालका-साई नगर शिरडी एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) वाया हज़रत निजामुद्दीन, भोपाल, इटारसी
37. कामाख्या (गुवाहाटी)-आनंद विहार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया कटिहार, बरौनी, सीतापुर कैण्ट, मुरादाबाद
38. कामाख्या (गुवाहाटी)-बेंगलुरु एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
39. कानपुर-आनंद विहार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया फर्रूखाबाद
40. कटिहार-हावड़ा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया मालदा टाऊन
41. कटरा-कालका एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) वाया मोरिन्डा
42. कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया अमेठी, रायबरेली, मथुरा
43. कोलकाता-सीतामढ़ी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया झाझा, बरौनी, दरभंगा
44. कोटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया मथुरा, पलवल
45. कुनूर्ल टाऊन-सिकंदराबाद एक्सप्रेस (दैनिक)
46. लोकमान्य तिलक (टी)-कोचुवेली एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
47. लखनऊ-वाराणसी एक्सप्रेस (सप्ताह में 6 दिन) वाया रायबरेली
48. मडगांव-मंगलोर इंटरिसटी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया उडुपी, करवार
49. मंगलोर-काचेगुडा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया धोने, गूत्ती, रेणिगुंटा, कोयंबतूर
50. मऊ-आनंद विहार एक्सप्रेस (सप्ताह में 2 दिन)
51. मुंबई-सोलापुर एक्सप्रेस (सप्ताह में 6 दिन) वाया पुणे
52. नागरकोइल-बेंगलुरु एक्सप्रेस (दैनिक) वाया मदुरै, तिरुचिरापल्ली
53. नई दिल्ली-कटरा एसी एक्सप्रेस (सप्ताह में 6 दिन)
54. निजामाबाद-लोकमान्य तिलक (टी) एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
55. पटना-सासाराम इंटरिसटी एक्सप्रेस (दैनिक) वाया आरा
56. पाटलीपुत्र (पटना)-बेंगलुरु एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया छिवकी
57. पुडुचेरी-कन्याकुमारी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया विल्लुपुरम, मइलादुतुरै, तिरुचिरापल्ली
58. पुरी-साई नगर शिरडी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया संबलपुर, टिटलागढ़, रायपुर, नागपुर, भुसावल
59. पुरी-अजमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया आबू-रोड
60. राधिकापुर-आनंद विहार लिंक एक्सप्रेस (दैनिक)
61. राजेन्द्र नगर टर्मिनल (पटना)-न्यू तिनसुकिया एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया कटिहार, गुवाहाटी
62. तिरुपति-पुडुचेरी एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
63. तिरुपति-भुवनेश्वर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया विशाखापट्नम
64. ऊना/नंगल डैम-हजूर साहेब नांदेड़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया आनंदपुर साहिब, मोरिंडा, चंडीगढ़, अंबाला
65. विशाखापट्नम-जोधपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया टिटलागढ़, रायपुर
66. विशाखापट्नम-कोल्लम एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
67. यशवंतपुर-लखनऊ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वाया राय-बरेली, प्रतापगढ़


नई पैसेंजर ट्रेन
1. बिठंडा-धुरी पैसेंजर (दैनिक)
2. बीकानेर-रतनगढ़ पैसेंजर (दैनिक)
3. भावनगर-पिलटाना पैसेंजर (दैनिक)
4. भावनगर-सुरेन्द्र नगर पैसेंजर (दैनिक)
5. बरेली-लालकुआं पैसेंजर (दैनिक)
6. छपरा-थावे पैसेंजर (दैनिक)
7. लोहारू-सीकर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद
8. मडगांव-रत्नागिरी पैसेंजर (दैनिक)
9. मारिकुप्पम-बेंगलुरु पैसेंजर (दैनिक)
10. मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी पैसेंजर (दैनिक) वाया रून्नी सैदपुर
11. नादियाड़-मोडासा पैसेंजर (सप्ताह में 6 दिन)
12. नांदियाल-कुर्नूल टाऊन पैसेंजर (दैनिक)
13. न्यू अमरावती-नारखेड़ पैसेंजर (दैनिक)
14. पुनलूर-कोल्लम पैसेंजर (दैनिक)
15. पूर्णा-परली वैजनाथ पैसेंजर (दैनिक)
16. पलानी-तिरूचंदूर पैसेंजर (दैनिक)
17. रतनगढ़-सरदारशहर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद
18. समस्तीपुर-बनमनखी पैसेंजर वाया सहरसा, मधेपुरा (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद
19. शोरानूर-कोजीकोडे पैसेंजर (दैनिक)
20. सुरेंद्र नगर-ध्रांगध्रा पैसेंजर (दैनिक)
21. सूरतगढ़-अनूपगढ़ पैसेंजर (दैनिक)
22. सोमनाथ-राजकोट पैसेंजर (दैनिक)
23. सीतामढ़ी-रक्सौल पैसेंजर (दैनिक)
24. श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़-सादुलपुर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद
25. तालगुप्पा-शिमोगा टाऊन पैसेंजर (दैनिक)
26. त्रिशूर-गुरुवायूर पैसेंजर (दैनिक)


नई मेमू ट्रेनों की सूची--
1. बाराबंकी-कानपुर
2. चेन्नई-तिरुपति
3. दिल्ली-रोहतक (मेमू द्वारा परंपरागत सेवा को बदलकर)
4. लखनऊ-हरदोई
5. सियालदह- बरहामपोर कोर्ट


नई डेमू ट्रेनों की सूची--
1. भटकल-ठोकुर
2. दिल्ली-कुरुक्षेत्र वाया कैथल
3. कटवा-जंगीपुर
4. लखनऊ-सुल्तानपुर
5. लखनऊ-प्रतापगंज वाया गौरीगंज
6. मडगांव-करवार
7. रोहतक-रेवाड़ी
8. तरन तारन-गोइंदवाल साहेब


इन ट्रेनों का विस्तार हुआ है
1. 19601/19602 अजमेर-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस का उदयपुर तक
2. 15715/15716 अजमेर-किशनगंज एक्सप्रेस का न्यू जलपाईगुड़ी तक
3. 12403/12404 इलाहाबाद-मथुरा एक्सप्रेस का जयपुर तक
4. 17307/17308 बगलकोट-यशवंतपुर एक्सप्रेस का मैसूर तक
5. 18437/18438 भुवनेश्वर-भवानीपटना एक्सप्रेस का जूनागढ़ तक
6. 18191/18192 छपरा-कानपुर अनवरगंज एक्सप्रेस का फर्रूख़ाबाद तक
7. 16127/16128 चेन्नई-गुरुवायूर एक्सप्रेस के चेन्नई-मदुरै भाग का तूतीकोरिन तक
8. 12231/12232 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस का पटना तक (2 दिन)
9. 12605/12606 चेन्नई-तिरुचिरापल्ली एक्सप्रेस का करईकुडी तक
10. 14007/14008 दिल्ली-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस का रक्सौल तक आमान परिवर्तन के बाद
11. 14017/14018 दिल्ली-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस का रक्सौल तक आमान परिवर्तन के बाद
12. 12577/12578 दरभंगा-बेंगलुरु एक्सप्रेस का मैसूर तक
13. 14731/14732 दिल्ली-बठिंडा एक्सप्रेस का फाजिल्का तक
14. 14705/14706 दिल्ली सराय रोहिल्ला-सादुलपुर एक्सप्रेस का सुजानगढ़ तक (सालासर एक्सप्रेस)
15. 15159/15160 दुर्ग-छपरा एक्सप्रेस का मुजफ्फरपुर और गोंदिया तक
16. 12507/12508 गुवाहाटी-एणार्कुलम एक्सप्रेस का तिरुवनंतपुरम तक
17. 17005/17006 हैदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस का रक्सौल तक आमान परिवर्तन के बाद
18. 17011/17012 हैदराबाद-बेलमपल्ली एक्सप्रेस का सिरपुर कागज़नगर तक
19. 16591/16592 हुबली-बेंगलुरु एक्सप्रेस का मैसूर तक
20. 12181/12182 जबलपुर-जयपुर एक्सप्रेस का अजमेर तक
21. 15097/15098 जम्मूतवी-बरौनी एक्सप्रेस का भागलपुर तक
22. 13117/13118 कोलकाता-बरहामपुर कोट एक्सप्रेस का लालगोला तक
23. 22981/22982 कोटा-हनुमानगढ़ एक्सप्रेस का श्रीगंगानगर तक
24. 15609/15610 लालगढ़-गुवाहाटी एक्सप्रेस का न्यू तिनसुकिया तक
25. 12145/12146 लोकमान्य तिलक (टी)-भुवनेश्वर एक्सप्रेस का पुरी तक
26. 12545/12546 लोकमान्य तिलक (टी)-दरभंगा एक्सप्रेस का रक्सौल तक, आमान परिवर्तन के बाद
27. 12449/12450 मडगांव-हजरत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस का चंडीगढ़ तक
28. 12653/12654 मंगलोर-तिरुचिरापल्ली एक्सप्रेस का पुडुचेरी तक
29. 29019/29020 मेरठ-नीमच लिंक एक्सप्रेस का मंदसौर तक
30. 22107/22108 मुंबई सीएसटी-लातूर एक्सप्रेस का हजूर साहेब नांदेड़ तक
31. 14003/14004 नई दिल्ली-न्यू फरक्का एक्सप्रेस का मालदा टाऊन तक
32. 15723/15724 न्यू जलपाईगुड़ी-दरभंगा एक्सप्रेस का सीतामढ़ी तक
33. 18419/18420 पुरी-दरभंगा एक्सप्रेस का जयनगर तक
34. 19327/19328 रतलाम-चित्तौड़गढ़ एक्सप्रेस का उदयपुर तक
35. 13133/13134 सियालदह-वाराणसी एक्सप्रेस (2 दिन) का लखनऊ, मुरादाबाद के रास्ते दिल्ली तक
36. 14711/14712 श्रीगंगानगर-हरिद्वार एक्सप्रेस का ऋषिकेश तक
37. 16535/16536 सोलापुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस का मैसूर तक
38. 19251/19252 सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेस का ओखा तक
39. 12629/12630 यशवंतपुर-हज़रत निज़ामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का 2 दिन चंडीगढ़ तक विस्तार
40. 59601/59602 अजमेर-ब्यावर पैसेंजर का मारवाड़ तक
41. 56513/56514 बेंगलुरु-नागौर पैसेंजर का करईकल तक
42. 51183/51184 भुसावल-अमरावती पैसेंजर का नारखेड़ तक
43. 57502/57503 बोधन-कामारेड्डी पैसेंजर का मिर्जापल्ली तक
44. 54632/54633 धुरी-हिसार/हिसार-लुधियाना पैसेंजर का सिरसा तक
45. 56700/56701 मदुरै-कोल्लम पैसेंजर का पुनलूर तक
46. 56709/56710 मदुरै-दिंडीगुल पैसेंजर का पलनी तक
47. 56275/56276 मैसूर-शिमोगा टाऊन पैसेंजर का तालगुप्पा तक
48. 59297/59298 पोरबंदर-वेरावल पैसेंजर का सोमनाथ तक
49. 66611/66612 एणार्कुलम-त्रिशूर मेमू का पालक्काड तक
50. 67277/67278 फलकनुमा-भोनिगर मेमू का जनगांव तक
51. 66304/66305 कोल्लम-नागरकोइल मेमू का कन्याकुमारी तक
52. 63131/63132 कृष्णानगर सिटी-बरहामपोर कोर्ट मेमू का रानाघाट और कोसिमबाज़ार तक
53. 74021/74024 दिल्ली-शामली डेमू का सहारनपुर तक
54. 76837/76838 करईकुडी-मानमदुरै डेमू का विरूदुनगर तक, आमान परिवर्तन के बाद
55. 79454/79445 मोरबी-वानकानेर डेमू का राजकोट तक
56. 77676/77677 मिरयालगुडा-निडकुडी डेमू का पिडुगरुल्ला तक
57. 79301/79302 रतलाम-चित्तौड़गढ़ डेमू का भीलवाड़ा तक


ट्रेनों के फेरों में वृद्धि--
1. 12547/12548 आगरा फोर्ट-अहमदाबाद एक्सप्रेस 3 से 7 दिन
2. 11453/11454 अहमदाबाद-नागपुर एक्सप्रेस 2 से 3 दिन
3. 22615/22616 कोयंबटूर-तिरुपति एक्सप्रेस 3 से 4 दिन
4. 14037/14038 दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस 3 से 6 दिन
5. 19409/19410 गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
6. 13465/13466 हावड़ा-मालदा टाऊन एक्सप्रेस 6 से 7 दिन
7. 12159/12160 जबलपुर-अमरावती एक्सप्रेस 3 से 7 दिन
8. 11103/11104 झांसी-बांद्रा (टी) एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
9. 19325/19326 इंदौर-अमृतसर एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
10. 12469/12470 कानपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
11. 12217/12218 कोचुवेली-चंडीगढ़ एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
12. 12687/12688 मदुरै-देहरादून/चंडीगढ़ एक्सप्रेस 1 से 2 दिन
13. 13409/13410 मालदा टाऊन-जमालपुर एक्सप्रेस 6 से 7 दिन
14. 17213/17214 नरसापुर-नागरसोल (साई नगर शिरडी के निकट) एक्सप्रेस 2 से 7 दिन
15. 12877/12878 रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस 2 से 3 दिन
16. 18509/18510 विशाखापट्नम-हजूर साहेब नांदेड़ एक्सप्रेस 2 से 3 दिन
17. 22819/22820 विशाखापट्नम-लोकमान्य तिलक (टी) एक्सप्रेस 2 से 7 दिन
18. 18309/18310 संबलपुर-हजूर साहेब नांदेड़ एक्सप्रेस 2 से 3 दिन
19. 12751/12752 सिकंदराबाद-मनुगुरु एक्सप्रेस 3 से 7 दिन
20. 12629/12630 यशवंतपुर-हज़रत निज़ामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 2 से 4 दिन
21. 56221/56222/56525/56526 बेंगलुरु-तुमकुर पैसेंजर 6 से 7 दिन
22. 56321 कन्याकुमारी-तिरुनेलवेली पैसेंजर 6 से 7 दिन
23. 56325 नागरकोइल-कन्याकुमारी पैसेंजर 6 से 7 दिन
24. 56312 तिरुनेलवेली-नागरकोइल पैसेंजर 6 से 7 दिन।

Source: Internet

Tuesday, 26 February 2013

गाँव तो गाँव है


गाँव तो गाँव है चाहे बंगाल का हो या बिहार का या फिर पहाड़ का, मगर भारत को भारत बनाने वाले ये गाँव आज फरयादी बन गए हैं फिर भी हम गाँव वालों को फ़रियाद करने में कोई शर्म महसूस नहीं हो रही है कि आप लोग (प्रवासी) गाँव के बारे में थोडा तो सोचो। गाँव में अगर छुट्टियाँ मानाने आते हो तो विकास की बातें भी कर लिया करो.......................
और गाँव वालों से भी ये अपील है की अगर कोई फ़रियाद नहीं सुनता आप धैर्य रखिये मेहनत कीजिये बस कुछ ही दिन बचे हैं जब दुनिया का सबसे बड़ा बाजार गाँव में ही लगेगा।
photo by http://www.gaonconnection.com/


Monday, 25 February 2013

नेताबाजी:रविश पोखरियाल

राजनीती की जंजीरों पर जकड़े हुए बडबोले नेता उत्तराखंड जितना छोटा राज्य है उतना अधिक यहाँ नेताओ की भर मार है चाय की दुकान से लेकर प्रदेश के सत्ता के गलियारों तक बस नेताजी ही नेताजी है

राजकाज में मुख्य भूमिका निभाने वाले सचिवालय में तो राजनीती का सबसे बड़ा अखाडा है अधिकारी तो सरकार को अपनी जागीर मानते है प्रदेश की वित्तीय स्थिति किसी से छुपी नहीं हुई है

राज्य में बेरोजगारों की फ़ौज बढती ही जा रही है राज्य सरकार के कई विभागों में कई पद रिक्त है सचिवालय में बैठे अधिकारी मुख्यमंत्री व मंत्रियो को कमजोर वितीय स्थिति का हवाला देकर रिक्त पदों पर भर्ती के मामलो को लटकाया जा रहा है (बेक डोर-आउट सोर्स को ठेके देकर अपने लोगो को नौकरियों में घुसाया जा रहा है) नौकरशाही का सरकार पर हावी होने का मुख्य कारण सरकार का कमजोर होना आश्चर्य तो यह है कि सरकार एक और तो वार्षिक बजट कार्य रोजना तैयार करती है और दूसरी और योजना को संचालित करने हेतु आवश्यक सृजित पदों पर भर्ती नहीं करती है जिसके कारण योजना के कार्य समय से पुरे नहीं होते कार्य में गुणवता नहीं रहती और बजट भी लैप्स हो जाता है

केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में कही परियोजना संचालित की जा रही है जिसमे 65 फीसदी बजट केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है नौकरशाही कि निष्क्रियता के कारण केंद्र सरकार की परियोजनाओ में कई पद रिक्त चल रहे है और बजट प्रतिवर्ष लैप्स हो रहा है

Saturday, 16 February 2013

तेरी सौं (उत्तराखंडी फीचर फिल्म)

तेरी सौं 2003 में बना एक उत्तराखण्डी चलचित्र है। यह चलचित्र उत्तराखण्ड आन्दोलन पर आधारित है। तेरी सौं का हिन्दी अर्थ है, “तेरी सौगन्ध”।

इस चलचित्र का लेखन, निर्माण, और निर्देशन अनुज जोशी द्वारा किया गया था, जो मुम्बई-आधारित टीवी कार्यक्रम निर्देशक हैं। मदन दुकलन, जो चिट्ठी-पत्री नमक चलचित्र के सम्पादक हैं, ने इस चलचित्र के गाने लिखे और आलोक मालसी संगीतकार हैं। इस चलचित्र में उत्तराखण्ड सांस्कृतिक मोर्चा के मौसमी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने अभिनय किया है जैसे रामेन्द्र कोटनला, दुर्गा कुकरेती, रोशन धस्माना, रजिनी दुकलन, कौलाना घन्स्याल, गिरिश सुन्द्रियाल, विनीत गैरोला, गोकुल पँवार और अन्य। इस बीच, हीरो मानव और हिरोइन मान्सी का अभिनय क्रमशः सक्षम जुयाल और पूजा रावत ने किया है।
इस चलचित्र के ७०% संवाद हिन्दी में बदल जाते हैं, लेकिन इस चलचित्र के दो अन्य संस्करण कुमाऊँनी और गढ़वाली भाषाओं में निकाले गए ताकि राज्य के दोनों मण्डलों की मौलिकता को इस चलचित्र से जोड़ा जा सके। चलचित्र के रिलीज़ होने के प्रथम पखवाड़े में ही साउण्डट्रैक की 35,000 प्रतियाँ बिक गईं, जो किसी भी कुमाऊँनी या गढ़वाली चलचित्र के लिए एक कीर्तिमान है।

यह चलचित्र पात्रों के काल्पनिक जीवन के साथ-साथ 1994 की घटनाओं से सम्बन्धित तथ्यों का मिश्रण हैं। जबकि चलचित्र के प्रथम अर्धभाग में नायक और नायिका मिलते है, वहीं मुजफ्फरनगर घटना के कुकर्म पात्रों को अधिक निराशाजनक पथ पर ले जाते हैं। आखिरकार, नायक के परिवरजनों, शिक्षकों, और सम्बन्धियों का प्यार उसे हिंसा का रास्ता त्यागने के लिए आश्वस्त करता है और वह उत्तराखण्ड संघर्ष को शान्तिपूर्ण और लोकतान्त्रिक माध्यम से जारी रखता है।

Source:
http://hi.wikipedia.org/s/29c5

"ले मशालें चल पड़े है लोग मेरे गाँव के" गीत




फिल्म के कुछ दृश्य



Friday, 15 February 2013

नन्दा देवी राजजात - 2013


नन्दा देवी राजजात - 2013( 29-Aug to 16 Sept 2013)

नन्दा देवी राजजात भारत के उत्तरांचल राज्य में होने वाली एक नन्दा देवी की एक धार्मिक यात्रा है। यह उत्तरांचल के कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। यह लगभग १२ वर्षों के बाद आयोजित होती है। अन्तिम जात सन् २००१ में हुयी थी। अगली राजजात सन् २०१३में होगी[1]।



नन्दादेवी राजजात उत्तराखंड की एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो भूमि की सांकृतिक विरासत की महक चारों ओर बिखेर देती है। जात का अर्थ होता है देवयात्रा अतः नन्दा राजजात का अर्थ है राज राजेश्वरी नन्दादेवी की यात्रा। यह यात्रा इष्ट देव भूमि में मानव और देवताओं के संबंधों कर अनूटी दास्तान है। यह यात्रा पहाड़ के कठोर जीवन का आयना है। तो पहाड़ी में ध्याणी (विवाहित बेटी-बहन) के संघर्षों की कहानी भी है। राजजात की शुरूवात आठवीं सदी के आसपास हुई बताई जाती है। यह वह काल था जब आदि गुरू शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में चार पीठों की स्थापना की थी।
लोक इतिहास के अनुसार नन्दा गढ़वाल के राजाओं के साथ-साथ कुँमाऊ के कत्युरी राजवंश की ईष्टदेवी थी। ईष्टदेवी होने के कारण नन्दादेवी को राजराजेश्वरी कहकर सम्बोधित किया जाता है। नन्दादेवी को पार्वती की बहन के रुप में देखा जाता है परन्तु कहीं-कहीं नन्दादेवी को ही पार्वती का रुप माना गया है। नन्दा के अनेक नामों में प्रमुख हैं शिवा, सुनन्दा, शुभानन्दा, नन्दिनी। पूरे उत्तराँचल में समान रुप से पूजे जाने के कारण नन्दादेवी के समस्त प्रदेश में धार्मिक एकता के सूत्र के रुप में देखा गया है। रूपकुण्ड के नरकंकाल, बगुवावासा में स्थित आठवीं सदी की सिद्ध विनायक भगवान गणेश की काले पत्थर की मूर्ति आदि इस यात्रा की ऐतिहासिकता को सिद्ध करते हैं, साथ ही गढ़वाल के परंपरागत नन्दा जागरी (नन्दादेवी की गाथा गाने वाले) भी इस यात्रा की कहानी को बयॉं करते हैं। नन्दादेवी से जुडी जात (यात्रा) दो प्रकार की हैं। वार्षिक जात और राजजात। वार्षिक जात प्रतिवर्ष अगस्त-सितम्बर मॉह में होती है। जो कुरूड़ के नन्दा मन्दिर से शुरू होकर वेदनी कुण्ड तक जाती है और फिर लौट आती है, लेकिन राजजात 12 वर्ष या उससे अधिक समयांतराल में होती है। मान्यता के अनुसार देवी की यह ऐतिहासिक यात्रा चमोली के नौटीगाँव से शुरू होती है और कुरूड़ के मन्दिर से भी दशोली और बधॉण की डोलियॉं राजजात के लिए निकलती हैं। इस यात्रा में लगभग २५० किलोमीटर की दूरी, नौटी से होमकुण्ड तक पैदल करनी पड़ती है। इस दौरान घने जंगलों पथरीले मार्गों, दुर्गम चोटियों और बर्फीले पहाड़ों को पार करना पड़ता है।
अलग-अलग रास्तों से ये डोलियॉं यात्रा में मिलती है। इसके अलावा गाँव-गाँव से डोलियॉं और छतौलियॉं भी इस यात्रा में शामिल होती है। कुमाऊँ (कुमॉयू) से भी अल्मोडा, कटारमल और नैनीताल से डोलियॉं नन्दकेशरी में आकर राजजात में शामिल होती है। नौटी से शुरू हुई इस यात्रा का दूसरा पड़ाव इड़ा-बधाणीं है। फिर यात्रा लौठकर नौटी आती है। इसके बाद कासुंवा, सेम, कोटी, भगौती, कुलसारी, चैपडों, लोहाजंग, वाँण, बेदनी, पातर नचौणियाँ से विश्व-विख्यात रूपकुण्ड, शिला-समुद्र, होमकुण्ड से चनण्यॉंघट (चंदिन्याघाट), सुतोल से घाट होते हुए नन्दप्रयाग और फिर नौटी आकर यात्रा का चक्र पूरा होता है। यह दूरी करीब 280 किमी. है।
इस राजजात में चौसिंग्या खाडू़ (चार सींगों वाला भेड़) भी शामिल किया जाता है जोकि स्थानीय क्षेत्र में राजजात का समय आने के पूर्व ही पैदा हो जाता है, उसकी पीठ पर रखे गये दोतरफा थैले में श्रद्धालु गहने, श्रंगार-सामग्री व अन्य हल्की भैंट देवी के लिए रखते हैं, जोकि होमकुण्ड में पूजा होने के बाद आगे हिमालय की ओर प्रस्थान कर लेता है। लोगों की मान्यता है कि चौसिंग्या खाडू़ आगे बिकट हिमालय में जाकर लुप्त हो जाता है व नंदादेवी के क्षेत्र कैलाश में प्रवेश कर जाता है।
वर्ष 2000 में इस राजजात को व्यापक प्रचार मिला और देश-विदेश के हजारों लोग इसमें शामिल हुए थे। राजजात उत्तराखंड की समग्र संस्कृति को प्रस्तुत करता है। इसी लिये 26 जनवरी 2005 को उत्तरांचल राज्य की झांकी राजजात पर निकाली गई थी। पिछले कुछ वर्षों से पयर्टन विभाग द्वारा रूपकुण्ड महोत्व का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस यात्रा के सफल संचालन हेतु श्री नन्दादेवी राजजात समिति का गठन भी किया है। इसी समिति के तत्त्वाधान में नन्दादेवी राजजात का आयोजन किया जाता है। परम्परा के अनुसार वसन्त पंचमी के दिन यात्रा के आयोजन की घोषणा की जाती है। इसके पश्चात इसकी तैयारियों का सिलसिला आरम्भ होता है। इसमें नौटी के नौटियाल एवं कासुवा के कुवरों के अलावा अन्य सम्बन्धित पक्षों जैसे बधाण के १४ सयाने, चान्दपुर के १२ थोकी ब्राह्मण तथा अन्य पुजारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन तथा केन्द्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा मिलकर कार्यक्रम की रुपरेखा तैयार कर यात्रा का निर्धारण किया जाता है।
आगे वर्ष 2012 में पुनः राजजात होनी तय हुई है, आशा करते हैं कि संचार व सड़क माध्यमों के पहले की अपेक्षा अधिक सुगम होने और इंटरनेट पर इस धार्मिक यात्रा की जानकारी बिशेषकर हिन्दी भाषा में उपलब्धता बहुत लोगों को इस व्यापक, ऐतिहासिक व धार्मिक यात्रा में शामिल होने व जानने के लिए आकर्षित करेगा।
{ मान्यताओं के अनुसार राजजात तब होती है जब देवी का दोष (प्रकोप) लगने के लक्षण दिखाई देते हैं। ध्याणी (विवाहित बेटी-बहन) भूमिया देवी ऊफराई की पूजा करती है इसे मौड़वी कहा जाता है। ध्याणीयां यात्रा निकालती है, जिसे डोल जातरा कहा जाता है। कासुंआ के कुंवर (राज वंशज) नौटी गाँव जाकर राजजात की मनौती करते हैं। कुंवर रिंगाल की छतोली (छतरी) और चौसिंग्या खाडू़ (चार सींगों वाला भेड़) लेकर आते हैं। चौसिंगा खाडू का जन्म लेना राजजात की एक खास बात है। नौटियाल और कुँवर लोग नन्दा के उपहार को चौसिंगा खाडू की पीठ पर होमकुण्ड तक ले जाते हैं। वहाँ से खाडू अकेला ही आगे बढ़ जाता है। खाडू के जन्म साथ ही विचित्र चमत्कारिक घटनाये शुरु हो जाती है। जिस गौशाला में यह जन्म लेता है उसी दिन से वहाँ शेर आना प्रारम्भ कर देता है और जब तक खाडू़ का मालिक उसे राजजात को अर्पित करने की मनौती नहीं रखता तब तक शेर लगातार आता ही रहता है। }
Source:
http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें।


पक्षियों की मधुर चहक - चहक,
फूलों की अमृत महक - महक,
हजारो खुशियाँ खुद में समेटे,
देखो रे देखो ऋतुराज, बसंत आया।



Wednesday, 13 February 2013

सवाल - बीरोंखाल और थलीसैंण वालों दोस्तों से



बीरोंखाल और थलीसैंण ब्लाक वालों से खासकर यह  जानना चाहता हूँ कि क्या सोचते हो यार कभी संगठित होना है या नहीं? जहाँ भी क्षेत्र के विकास की बात आती है हम लोग एक साथ हो ही नहीं पाते हैं चाहे फेसबुक पर हो या सामान्य जिंदगी में। कई अरसे से देख रहा हूँ इस क्षेत्र के कुछ लोग विकास के मुद्दे तो उठाते हैं मगर उस पर कोई चर्चा ही नहीं होती अन्य क्षेत्रों में ऐसा नहीं है, अगर सिर्फ फेसबुक या सोशल मीडिया की बात की जाये तो ऐसा लगता है की बीरोंखाल और थलीसैंण के लोग तो शायद यहाँ हैं ही नहीं। यहाँ कोई अगर कोई इस क्षेत्र की फोटो अपलोड कर दे तो १५-२० लाइक मिल जाये मगर अगर कोई गंभीर मुद्दा हो तो सारे "फेसबुक में के बीरोंखाल-थलीसैंण महोल्ला" वाले चुप्पी साध लेते हैं।

हाल ही में रवीश जी ने "बीरोंखाल अलग जिले की मांग" पर लेख लिखा था लोगों  ने वहां भी अपने बेरुखी दिखाई, सच तो ये है की हमे ये बात माननी पड़ेगी की हम संगठित नहीं है तभी तो बीरोंखाल-थलीसैंण क्षेत्र की उपेक्षा की जाती है जहाँ अन्य क्षेत्र प्रगति की राह पर चल रहे हैं और हम उतनी तेजी से पिछड़ रहे है (अन्य क्षेत्रों की लोग कृपया इसे मेरी जलन न समझे), निशंक और अमृता रावत व सतपाल महाराज जैसे नेता हमारे क्षेत्र से आते हैं मगर हमे वो भी  नजर-अंदाज कर के निकल जाते है वो सिर्फ इसलिए की हम संगठित नहीं है।

शायद हम अपनी निजी जिंदगी में बहुत खुस है इसलिए क्षेत्र के बारे में सोच नहीं पाते मगर इस क्षेत्र ने बहुत कुछ दिया है ये धरती हमारी जन्मस्थली है, हमने बचपन में यहाँ पर सपने देखे है। हमारे पूर्वजों ने इसे क्षेत्र को बड़े प्यार और लगन से संझोया है इस सब बातों को ध्यान में रखकर एक बार तो संगठित होईये आप लोग।

आपके जबाब का इंतजार रहेगा अच्छा न लगे तो आलोचना सही मगर लिखियेगा जरूर।

बलबंत गुसाईं
गाँव फाउंडेशन